Generations of Computers | कंप्यूटर की पीढ़ियाँ

 

Generations of Computers - Computer Gyan हिंदी

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Generations of Computers 

आज हम आपको कंप्यूटर का जनरेशन Generations of Computers के बारे में बताने जा रहे है हमारा प्रयास है की आप लोगो को Generations of Computers के बारे में अच्छे से पता चले हम आज आपको बहुत ही असान और स्पस्ट रूप में आपको Generations of Computers के बारे में बताएंगे। चलिए फिर शुरू करते हैं –

द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व कंप्यूटर्स पूरी तरह से यांत्रिक थे। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कंप्यूटर का महत्व अचानक बढ़ गया, क्योंकि सेना अपने सभी गुप्त दस्तावेजों को अपने लोगों के बीच में पहुंचाना चाहता था। इस आवश्यकता ने कंप्यूटर के विकास को तेज गति दी। कंप्यूटर की इस वृद्धि को विभिन्न चरणों में पांच भागों में बांटा जा सकता है। इन चरणों को ही कंप्यूटर की पीढ़ियाें के रूप में जाना जाता है।

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर ( 1946 से 1959 का दशक ) –

First Generations Computers - Computer Gyan हिंदी

व्यावसायिक कंप्यूटर युग की शुरुआत UNIVAC (यूनिवर्सल ऑटोमैटिक कंप्यूटर) से होती है। पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों का इस्तेमाल 1942-1955 के दौरान किया गया था। वे वैक्यूम ट्यूब पर आधारित थे। प्रथम पीढ़ी में कंप्यूटर का मुख्य हिस्सा वैक्यूम ट्यूब्स (Vaccum Tubes) थी। वैक्यूम ट्यूब्स एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसके जरिये डिजिटल सिग्नल का संसाधन काफी तेज हो जाता है।

 

वैक्यूम ट्यूब्स से काफी अधिक मात्रा में उष्मा निकलती है, जिससे कंप्यूटर बार-बार बंद होता था। इस समय विभिन्न क्रियाओं के लिए कई तरह के कंप्यूटर विकसित हुए। पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों के उदाहरण इनमें से कुछ इस प्रकार हैं –

  • ENIAC – इलेक्ट्रौनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर
  • EDVAC – इलेक्ट्रॉनिक डिस्क्रीट वेरिएबल ऑटोमैटिक कंप्यूटर
  • UNIVAC – यूनिवर्सल ऑटोमैटिक कंप्यूटर
  • Mark1 –
  • IBM-701
  • IBM-650

 

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें लाभ (Advantages) :-

  • वैक्यूम ट्यूब उन दिनों के दौरान उपलब्ध एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक घटक थे।
  • वैक्यूम ट्यूब प्रौद्योगिकी इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर बनाने के लिए संभव बनाया।
  • ये कंप्यूटर मिलीसेकंड में डेटा की गणना कर सकते थे।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें नुकसान (Disadvantages) :-

  • कंप्यूटर का आकार बहुत बड़े होते थे, जो पुरे कमरे को घेरते थे।
  • इसमें काफी मात्रा में ऊर्जा छोड़ते थे।
  • गैर-पोर्टेबल (Non-portable)
  • इसमें केवल सीमित व्यावसायिक उपयोग होता था।
  • यह बहुत धीमी गति का होता था और प्रायः समस्या पैदा करते थे।
  • केवल मशीन भाषा का इस्तेमाल किया।
  • उपयोग किए गए चुंबकीय ड्रम जो बहुत कम डेटा भंडारण प्रदान करते हैं।

 

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ( 1959 से 1965 का दशक ) –

Second Generations Computers - Computer Gyan हिंदी

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल करते थे। ट्रांजिस्टर के साथ वैक्यूम ट्यूबों को बदलने से कंप्यूटरों का आकार कम हो गया था। द्वितीय चरण में विकसित हुए कंप्यूटर्स में वैक्यूम ट्यूब्स  (Vaccum Tubes) के स्थान पर ठोस पदार्थ  का उपयोग हुआ। जिसे ट्रांजिस्टर (Transister) कहा जाता है। वैक्यूम ट्यूब्स की तुलना में ट्रांजिस्टर काफी सुविधाजनक थे। वे काफी दक्ष तथा वैक्यूम ट्यूब्स की तुलना में काफी सस्ते थे।

इस समय उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाएं जैसे COBOL तथा FORTRON मौजूद था तथा कंप्यूटर डिज़ाइनिंग में भी कई महत्वपूर्ण कार्य हुए। दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण IBM 7094 series, IBM 1400 series और CDC 164 आदि हैं।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के उदाहरण इनमें से कुछ इस प्रकार हैं –

  • IBM-1620
  • IBM-7094
  • CDC 1604
  • CDC 3600
  • UNIVAC 1108

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें लाभ (Advantages) :-

  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में आकार में छोटा।
  • कम गर्मी उत्पन्न करते थे और कम बिजली की खपत
  • बेहतर गति और माइक्रोसेकंड में डेटा की गणना कर सकता है।
  • टेप ड्राइव, मैग्नेटिक डिस्क, प्रिंटर आदि जैसे तेज परिधीयों का इस्तेमाल किया।
  • मशीन भाषा के बजाय असेंबली भाषा का इस्तेमाल किया।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें नुकसान (Disadvantages) :-

  • शीतलन प्रणाली की आवश्यकता थी।
  • लगातार रखरखाव की आवश्यकता थी।
  • केवल विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
  • बहुत महंगा होता था और बहुमुखी नहीं है।

 

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ( 1965 से 1971 का दशक ) –

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का उपयोग करते थे। 1961 में पहले IC का आविष्कार और उपयोग किया गया था। एक IC का आकार लगभग ¼ वर्ग इंच है। एक एकल IC चिप में हजारों ट्रांजिस्टर हो सकते हैं। कंप्यूटर का आकार में छोटा, तेज, अधिक विश्वसनीय और कम खर्चीला हो गया। तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के उदाहरण – IBM 370, IBM System / 360, UNIVAC 1108 और UNIVAC AC 9000 आदि हैं।

हालांकि वेक्यूम ट्यूब की तुलना में ट्रांजिस्टर में काफी सुधार था, लेकिन उनकी भी कुछ समस्याएं थी उनका सर्किट काफी जटिल होता था जिसमें एक अकेले ट्रांजिस्टर में कई कनेक्शन जुड़े रहते थे। एक बड़ी सफलता उस समय मिली, जब सैकड़ों ट्रांजिस्टरों को सफलतापूर्वक एक साथ जोड़कर उन्हें एक सिलिकॉन चिप में रखा जा सका। जिसे इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) कहां गया। इस तरह ट्रांजिस्टर्स के स्थान पर सिलिकॉन चिप के उपयोग से तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर्स की शुरुआत हुई।

इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) :-  जिसे कभी-कभी एक चिप या माइक्रोचिप कहा जाता है, एक अर्धचालक वेफर है जिस पर हजारों या लाखों छोटे प्रतिरोधक, कैपेसिटर और ट्रांजिस्टर गढ़े जाते हैं।

 

कभी-कभी इस तरह के सर्किट की एक से ज्यादा पर्तें होती थी। इन्हें लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट (LSI) कहा गया। जो कंप्यूटर LSI सर्किट का उपयोग करते थे, उन्हें तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर्स कहा गया। LSI के विकास के परिणामस्वरुप छोटे आकार के कंप्यूटरों का विकास हुआ, जो काफी तेज गति से गणना करते थे।

 

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें लाभ (Advantages) :-

  • पिछली पीढ़ियों की तुलना में आकार में छोटा।
  • अधिक भरोसेमंद।
  • कम गर्मी उत्पन्न और कम बिजली की खपत
  • बेहतर गति और नैनोसेकंड में डेटा की गणना कर सकता है।
  • यह पहला कंप्यूटर है जो कीबोर्ड और माउस का उपयोग करते थे।
  • यह हाई लेवल लैंग्वेज को सपोर्ट करते थे।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें नुकसान (Disadvantages) :-

  • एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता थी।
  • आईसी चिप्स के निर्माण के लिए अत्यधिक परिष्कृत तकनीक की आवश्यकता होती है।
  • बहुत महंगा होता था।

 

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर ( 1971 से 1980 का दशक ) –

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों की शुरुआत माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार से हुई। माइक्रोप्रोसेसर में हजारों आईसी होते हैं। LSI (लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) सर्किट और VLSI (वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) सर्किट डिजाइन किया गया था। इसने कंप्यूटर के आकार को बहुत कम कर दिया। आधुनिक माइक्रोप्रोसेसरों का आकार आमतौर पर एक वर्ग इंच है। इसमें लाखों इलेक्ट्रॉनिक सर्किट शामिल हो सकते हैं। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों के उदाहरण Apple Macintosh & IBM PC हैं।

LSI टेक्नोलॉजी वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (VLSI) के विकास का रास्ता दिखाया। जिसमें लाखों ट्रांजिस्टरों को एक चिप में रखा जा सकता था। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर्स के लिए यही महत्वपूर्ण हिस्सा था। VLSI चिप और अधिक तेज गणना करने में समर्थ थी। इन चिप्स का इस्तेमाल अनेक घरेलू उपकरणों जैसे वाशिंग मशीन आदि में हुआ। माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार 1972 में हुआ। यह एक अकेली चिप कंप्यूटर के सारे प्रोसेस को कर सकती है।

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें लाभ (Advantages) :-

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर से हमें नुकसान (Disadvantages) :-

  • माइक्रोप्रोसेसरों के विनिर्माण के लिए नवीनतम तकनीक की आवश्यकता है।

 

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर ( 1980 से आज का दशक ) –

वैज्ञानिक पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटरों पर काफी सफलताओं के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial intelligence) की तकनीक पर आधारित है। कंप्यूटर बोले गए शब्दों को समझ सकते हैं और मानव तर्क का अनुकरण कर सकते हैं। अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता कहा जाता है। IBM वाटसन कंप्यूटर एक उदाहरण है जो हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों को आउटसोर्स करता है। इस पीढ़ी में अनुसंधानों का ध्यान ‘थिंकिंग कंप्यूटर’ को विकसित करने पर है। इस कंप्यूटर को पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर कहा जाता है। आप जिन कंप्यूटरों का इस्तेमाल कर रहे हैं वे पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर हैं।

⇒निम्नलिखित तालिका में सभी पीढ़ियों के कंप्यूटर तथा उनमें उपयोग की गई तकनीक को संक्षिप्त में बताया गया है –

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आज आप ने क्या सीखा?

इस पेज में हमने Generations of Computers | कंप्यूटर की पीढ़ियाँ के बारे में बेहतर ढंग से समझाने की कोशिश की है, मैं आशा करता हूँ  की आपको Generations of Computers के बारे में अच्छे से जानकारी हो गयी है।

अगर आपको कंप्यूटर की पीढ़ियाँ के बारे में पसंद आया होगा तो अपने दोस्तों और अपने सहपाठियों के पास शेयर जरुर करें और कुछ जानकारी चाहिए तो Comment Box में अपनी राय प्रस्तुत करे और इसी तरह की और जानकारी चाहिए तो हमसे Facebook और Telegram में जुड़ सकते है।

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